स्वाईन फ्लू, मलेरिया एवं डेंगू बीमारियां नोटिफायेबल डिजीज के रूप में अधिसूचित

प्रदेश में मौसमी बीमारियों स्वाईन फ्लू, मलेरिया, एवं डेंगू को नोटिफायेबल डिजीज के रूप में अधिसूचित किया गया है। राजस्थान ऎपिडेमिक अधिनियम 1957 के अन्तर्गत अब शामिल इन तीनों बीमारियों के रोगी सरकारी या गैर सरकारी चिकित्सा संस्थानों, क्लिनिक तथा लैब पर चिन्हित होने पर संस्था प्रभारियों को इनकी सूचना स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों को देना आवश्यक होगा।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री कालीचरण सराफ ने बताया कि मौसमी बीमारियों स्वाईन फ्लू, मलेरिया, एवं डेंगू को नोटिफायेबल डिजीज के रूप में अधिसूचित करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस नोटिफिकेशन के अन्तर्गत निरीक्षण अधिकारी को किसी भी परिसर में प्रवेश कर फीवर सर्विलेंस, एन्टीलार्वल गतिविधियां तथा इन बीमारियों की रोकथाम हेतु आवश्यक दवा छिड़काव संबंधी कार्यवाही करने के अधिकार दिये गये हैं। साथ ही संभावित रोगी की ब्लड स्लाइड, घर में पानी एकत्रित पाये जाने पर आवश्यकतानुसार एन्टीलार्वल गतिविधियां सम्पादित की जा सकेंगी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती वीनू गुप्ता ने बताया कि समस्त निजी अस्पताल, क्लिनिक तथा लैब को इन बीमारियों से संबंधित सूचना संबंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मय लाईन लिस्ट तथा पते के साथ दिया जाना आवश्यक होगा। उन्होंने बताया कि डेंगू के मरीजों की ब्लड सेम्पल जांच सुनिश्चित करने के लिए एलाइजा जांच हेतु सेन्टिनेल सर्विलेंस चिकित्सालय तथा राजकीय चिकित्सालयों पर भी जांच के लिए भिजवाया जाना भी आवश्यक होगा। मलेरिया तथा डेंगू की जांच के लिए भारत सरकार की गाईडलाईन की पालना सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि स्वाईन फ्लू हेतु केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाईट पर इसके इलाज, मरीज के घर पर सार संभाल तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा बचाव के साधन तथा केटेगरी ए बी सी के अनुसार कार्यवाही हेतु दिये गये निर्देशों की पालना किया जाना सभी के लिए आवश्यक होगा।
निर्धारित नियमों की पालना नहीं करने पर नियंत्रण अधिकारी भारतीय दण्ड सहिंता 1860 की सेक्शन 181 के अन्तर्गत 500 रुपये का जुर्माना भी लगा सकता है।